निर्भीक कलम
लैंसडौन : पर्यटन नगरी लैंसडौन में इस बार दशहरे का आकर्षण का केंद्र 20 फुट ऊंचा रावण का पुतला बना रहा। छावनी क्षेत्र में स्थापित यह विशाल पुतला न केवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कौतूहल का विषय बना है, बल्कि आपसी सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल भी पेश कर रहा है।
इस रावण के पुतले का निर्माण उत्तर प्रदेश के बिजनौर से आए मुस्लिम कारीगरों ने किया है। कारीगरों की महीनों की मेहनत और कलात्मकता इस पुतले में साफ दिखाई दे रही है। रामलीला कमेटी के अनुसार पुतले को तैयार करने में कुल 27,000 रुपये की लागत आई है। धर्म और समुदाय की सीमाओं से परे जाकर एक-दूसरे के त्योहारों में भागीदारी करना भारतीय संस्कृति की पहचान रही है। बिजनौर से आए मुस्लिम कारीगरों द्वारा रावण के पुतले का निर्माण इसी परंपरा और सामाजिक भाईचारे को दर्शाता है। छावनी क्षेत्र में रावण के पुतले को देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आए पर्यटक भी पहुंच रहे हैं। लोग न केवल पुतले की भव्यता की तारीफ कर रहे हैं, बल्कि इसे बनाने वाले कारीगरों की कला की भी सराहना कर रहे हैं।
कमेटी ने जताया आभार
रामलीला कमेटी के सदस्य अजय अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष कमेटी ने 27 हजार रुपये की लागत से रावण का पुतला बनवाया है। उन्होंने कहा कि यह केवल दशहरे के आयोजन का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव और एकता का प्रतीक भी बन गया है। लैंसडौन में स्थापित यह 20 फुट ऊंचा रावण का पुतला इस बार दशहरे के उत्सव को और भी खास बना रहा है और पर्यटन नगरी की पहचान में चार चांद लगा रहा है। उन्होंने रावण का पुतला तैयार करने वाले कारीगरों का आभार व्यक्त किया।



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